Q. उद्यमिता की परिभाषाएँ ( Definitions of Entrepremeneurship )
Ans :- उद्यमिता विकास व्यवसाय में जोखिम उठाने की क्षमता या भावना के साथ - साथ नवप्रवर्तन एवं नेतृत्व प्रदान करने की योग्यता भी है । परन्तु उद्यमिता विकास के आशय को वर्तमान में परिवर्तित परिस्थितियों में भली - भाँति समझने के लिए कुछ प्रमुख विद्वानों द्वारा दी गई परिभाषाओं को आधार बनाना होगा । उद्यमिता विकास की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानुसार हैं
( 1 ) जोसेफ शुम्पीटर के अनुसार , उद्यमिता एक नवप्रवर्तनकारी कार्य है । उक्त परिभाषा में जोसेफ शुम्पीटर ने ' नवप्रवर्तन ' को ही उद्यमिता का मुख्य तत्व माना हैं । आर्थिक विकास की गतिशीलता उद्यमिता द्वारा प्रदत्त नये परिवर्तन , नये सुधार व नवाचारों की प्रक्रिया पर ही निर्भर करती है । उद्यमिता द्वारा कुशल नेतृत्व प्रदान करने के कारण उद्यमी को ' आर्थिक अगुआ ' ( Economic Leader ) माना गया है ।
( 2 ) एफ . एच . फ्रेंज ( EN . Frantz ) के अनुसार , “ उद्यमिता उत्पादन के विभिन्न साधनों का एक उत्पादक इकाई के रूप में संगठन एवं संयोजन है । साहसी प्रबन्धक से बड़ा होता है । यह नवप्रवर्तक व प्रवर्तक दोनों ही है । " उक्त परिभाषा उद्यमिता के दो प्रमुख तत्वों पर बल देती है |
( i ) उपक्रम का प्रवर्तन एवं निर्माण |
( ii ) उपक्रम में नये - नये परिवर्तनों व नवाचारों को स्थान देना । यह प्रगतिशील दृष्टिकोण को अपनाती है |
( 3 ) एच . डब्ल्यू . जॉनसन ( H.W. Johnson ) के अनुसार , उद्यमिका तीन आधारभूत तत्वों का समिश्रण है |
( i ) अन्वेषण , ( ii ) नवप्रवर्तन एवं ( iii ) अनुकूलन आदि । उक्त परिभाषा में यह स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में ' उद्यमिता के लिये अन्वेषण नवकरण व व्यवसाय में समायोजन आवश्यक कार्य होने के साथ उद्यमिता के गत्यात्मक स्वरूप की योग्यता का होना आवश्यक है ।
( 4 ) एन . एच . पाठक ( H. N. Pathak ) के अनुसार , " उद्यमिता उन व्यापक क्षेत्रों को सम्मिलित करती है , जिनके सम्बन्ध में अनेक निर्णय लिये जाते हैं । " इन निर्णयों को तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है ।
( i ) अवसर ज्ञात करना , ( ii ) इकाई का संगठन करना , तथा ( iii ) इकाई को एक लाभप्रद व गतिशील संस्था के रूप में संचालित करना " उक्त परिभाषा उद्यमिता द्वारा व्यवसाय के कुशल व लाभप्रद संपालन हेतु लिये जाने वाले निर्णयों की विशिष्ट महत्वत्ता को प्रकट करती है ।
( 5 ) रिचमेन तथा कोपेन ( Richman and Copen ) के अनुसार , " उद्यमिता किसी सृजनात्मक , बाह्य या खुली प्रणाली की ओर संकेत करती है यह नवप्रवर्तन , जोखिम वहन तथा गतिशील नेतृत्व का कार्य है । " उक्त परिभाषा उद्यमिता को स्वतन्त्र स्वरूप प्रदान करती हुयी बाहरी वातावरण के साथ अच्छे व श्रेष्ठ समन्वय की ओर संकेत करती है । यह उद्यमिता के मौलिक कार्यों यथा नवप्रवर्तन , जोखिम वहनीयता व नेतृत्व आदि को स्पष्ट करती हैं तथा उद्यमी के समाज को गतिशील प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करती है ।
( 6 ) श्री वी . आर . गायकवाड़ ( V.R. Gailkwad ) के अनुसार , “ उद्यमिता से आशय नवप्रवर्तना से है । यह अनिश्चतताओं का सामना करने के लिए जोखिम वहन करने की इच्छा व अन्तः प्रकरण हैं यह भावी घटनाओं को इस प्रकार से देखने की क्षमता है जो बाद में सच सिद्ध हो ” । उक्त परिभाषा में निम्न तत्व स्पष्ट होते हैं l
( i ) उद्यमिता व्यवसाय में नये - नये परिवर्तन एवं सुधार लाने की योग्यता है l
( ii ) यह विभिन्न अनिश्चितताओं एवं जोखिमों को उठाने की क्षमता बताती है ।
( 7 ) जे . इ . स्टेपनेक के अनुसार उद्यमिता किसी उपक्रम में जोखिम उठाने की क्षमता , संगठन की योग्यता तथा विविधिकरण करने एवं नवप्रवर्तनों को जन्म देने की इच्छा है । " उक्त परिभाषा अत्यन्त सारगर्भित है । इसमें व्यवसाय की जोखिमों को वहन करने की क्षमता के साथ साथ नवकरण करने की भावना भी सम्मिलित है । यह परिभाषा उद्यमिता को आर्थिक विकास की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार मानती है ।
( 8 ) समूह की एक ए . एच . कोल ( AH . Cole ) के अनुसार “ उद्यमिता एक व्यक्ति या व्यक्तियों के के उद्देश्यपूर्ण क्रिया है जिसमें निर्णयों की एक एकीकृत श्रृंखला सम्मिलित होती है । यह आर्थिक वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन अथवा वितरण के लिये एक लाभप्रद व्यवसायिक इकाई का निर्माण , संचालन एवं विकास करता है ! निष्कर्ष - उपर्युक्त परिभाषाओं के अध्ययन से स्पष्ट है कि विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने उद्यमिता को विभिन्न एवं व्यापक अर्थों में परिभाषित किया है । इन परिभाषाओं के निष्कर्षों को निम्न दो भागों में विभक्त किया गया हैं l
( 1 ) प्राचीन मत ( Classical View ) - प्राचीन मत के अनुसार उद्यमिता विकास निम्नलिखित तत्वों से सम्बन्धित है l
( i ) व्यवसाय की अनिश्चितताओं व जोखिमों को वहन करने की क्षमता l
( ii ) उत्पादन के विभिन्न साधनों को एकत्रित एवं संगठित करने की योग्यता l
( iii ) उत्पादन साधनों को एक ' उत्पादक इकाई ' ( Productive Enity ) के रूप में संयोजित करने तथा उनका नियन्त्रण व निरीक्षण ( Superintendece ) करने की योग्यता । इस प्रकार यह मत जोखिम वहन एवं व्यवसाय के प्रवर्तन से सम्बन्धित है ।
( 2 ) आधुनिक मत ( Modem View ) - आधुनिक मत के अनुसार उद्यमिता विकास सम्बन्धी विचारों को संक्षेप में निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है l
( i ) उद्यमिता व्यवसाय में नवीन प्रवर्तनों एवं अवसरों की खोज करने , सामाजिक मूल्यों के सन्दर्भ में विभिन्न निर्णय लेने , सामाजिक नवप्रवर्तन ( Social Innovation ) करने और व्यवसायों को गतीशील नेतृत्व प्रदान करने की योग्यताएं है ।
( ii ) उद्यमिता व्यवसाय में विभिन्न प्रबन्धकीय कार्यों तथा योजना बनाने कर्मचारियों को संगठित करने , साधनों को एकत्र करने तथा विभिन्न कार्यों का नियन्त्रण करने आदि को शामिल किया गया है । संक्षेप में उद्यमिता व्यवसाय में विभिन्न जोखिमों को वहन करने , लाभप्रद साहसिक निर्णय होने सामाजिक नव प्रवर्तन करने तथा गतिशील नेतृत्व प्रदान करने की योग्यता है ।
( 9 ) संसाधनों की सृजनशीलता ( Creation of Resources ) उद्यमिता का मूल लक्ष्य उपलब्ध संसाधनों को प्राप्त कर उनका अधिकतम उपयोग करना है उद्यमिता द्वारा ही साधनों को संसाधनों में परिवर्तित किया जा सकता है तथा संसाधनों को आर्थिक मूल्यों में रूपान्तरित किया जा सकता है । संसाधनों की उपयोगिता या महत्वता में वृद्धि की जा सकती है तथा संसाधनों द्वारा धन सृजन की क्रियाओं की क्षमताओं को विकसित किया जा सकता है । उद्यमिता की वास्तविक पहचान संसाधनों की सृजनशीलता में निहित है ।
( 10 ) वातावरण प्रेरित क्रिया ( Environment - oriented activity ) - उद्यमिता वातावरण से जुड़ी हुई एक बाहा एवं खुली प्रणाली है । उद्यमी सदैव सामाजिक , आर्थिक , राजनैतिक एवं भौतिक वातावरण के घटकों को ध्यान में रखकर वस्तुओं का निर्माण करते हैं तथा उनमें परिवर्तन करने की जोखिम उठाते हैं ।
( 11 ) प्रबन्ध ' उद्यमिता का माध्यम है ( Management is the vehicle of Entrepreneurship ) किसी भी उपक्रम में प्रबन्ध की समस्त साहसिक निर्णयों व योजनाओं के क्रियान्वयन का माध्यम है । प्रबन्ध के द्वारा ही साहसी व्यवसाय में नये - नये परिवर्तन एवं सुधार लाता है ।
( 12 ) सार्वभौमिक क्रिया ( Universal Task ) मानव जीवन के सभी क्षेत्रों में उद्यमिता की आवश्यकता होती हैं । सामाजिक , व्यावसायिक , आर्थिक , तकनीकी , शिक्षा , चिकित्सा , अनुसंधान , सेना व खेलकूद आदि सभी क्षेत्रों में अनिश्चितताओं को वहन करने , जोखिमों का सामना करने व नवप्रवर्तन आदि करने में उद्यमियी प्रवृत्तियाँ आवश्यक होती है । सर्व व्यापक के कारण यह सार्व भौमिक क्रियाएं मानी गयी है ।
( 13 ) उद्यमिता ' स्वाभाविक ' नहीं , वरन् एक ' अर्जित ' कार्य है ( It is not ' Natural ' but an ' Achieved ' Work ) - अक्सर यह माना जाता है कि साहस प्रत्येक संगठन में स्वाभाविक रूप से विद्यमान होता है । किन्तु यह मिथ्या विचार है । प्रत्येक व्यक्ति एवं संगठन को उद्यमिता के लिए सतर्क रहकर प्रयास करना होता है , साहसिक भावना उत्पन्न करनी होती है तथा प्रत्येक व्यवहार में साहसिकता लानी होती है ।
( 14 ) सभी व्यवसायों एवं अर्थव्यवस्थाओं में आवश्यक ( Essential in all Businesses and Economies ) - उद्यमिता छोटे - बड़े सभी प्रकार के व्यवसायों में आवश्यक होती है । वस्तुतः यह प्रत्येक व्यवसाय के जीवित रहने के लिए तथा विकसित होने के लिए अनिवार्य है ।
( 15 ) पेशेवर क्रिया ( Professional Activity ) - विकसित राष्ट्रों में चिकित्सा , कानून व इंजीनियरिंग की भाँति साहस भी एक पेशे के रूप में विकसित हो रहा है । प्रबन्धीय योग्यताओं के साथ - साथ साहसी योग्यताओं को भी शिक्षण व प्रशिक्षण के द्वारा विकसित किया जाने लगा है ।
( 16 ) एक जीवन शैली ( A Life Style ) - उद्यमिता एक कार्य , व्यवसाय या पेशा ही नहीं है , यह जीवन को व्यवस्थित रूप से जीने का एक ढंग भी है । प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए रचनात्मक एवं कल्पनाशील होना आवश्यक होता है , उसमें योजना बनाने , ठोस निर्णय लेने व उन्हें क्रियान्वित करने की योग्यता होनी चाहिए ।


