उद्यमिता के सम्बन्ध में विभिन्न विचार ( Various Views about Entrepreneurship )
उद्यमिता के अर्थ के बारे में विद्वानों ने विभिन्न विचार प्रकट किये हैं। संक्षेप में , ये अग्रांकित प्रकार हैं।
( 1 ) जोखिम उठाने की क्षमता ( Risk Bearing Capacity ) - रिचार्ड केन्टीलॉन ( Richard Contillon ) ने उद्यमिता को जोखिम उठाने का एक महत्वपूर्ण कार्य माना है । उन्होंने इस शब्द का प्रयोग वस्तुओं को अनिश्चित मूल्य पर क्रय - विक्रय करने वाले व्यक्ति के लिए किया था । उनके अनुसार , उद्यमिता अबीमित जोखिम उठाने का कार्य है ( It is a function of bearing non - insurable risk ) । व्यवसाय का प्रारम्भ करने तथा उसका संचालन करने में साहसी को अनेक जोखिमों- अप्रचलन , ह्रास , घटबढ़ , परिवर्तन आदि का सामना करना पड़ता है । इसी प्रकार फ्रेंक एच नाइट ( Frank H. Knight ) ने भी अनिश्चितताओं का सामना करने वाले व्यक्तियों के विशिष्ट समूह को ' उद्यमी ' कहा है । उन्होंने सामान्य जोखिम तथा अनिश्चितता में अन्तर किया है । वे कहते हैं कि अनिश्चितता वह जोखिम है जिसका पूर्वानुमान एवं बीमा नहीं करवाया जा सकता है । ऐसे जोखिम को उठाने का नाम ही उद्यमिता है । उनके अनुसार उद्यमिता “ जोखिम उठाने की योग्यता , इच्छा तथा अनिश्चितता के विरुद्ध गारण्टी प्रदान करने की शक्ति है । ” " उद्यमिता के सम्बन्ध में यह मत अत्यन्त महत्वपूर्ण है । आधुनिक व्यवसाय में जटिलताओं के बढ़ जाने के फलस्वरूप जोखिम उठाने का कार्य और भी महत्वपूर्ण हो गया है ।
( 2 ) प्रबन्धकीय कौशल ( Managerial Skill ) - बी . एफ . हॉसलिज ( B.F. Hoeslitz ) का मत है कि उद्यमिता में वित्तीय योग्यता प्राथमिक नहीं है । उन्होंने ' प्रबन्धकीय कौशल ' को साहस का महत्वपूर्ण पहलू माना है । इसी प्रकार जे . एस . मिल ( J. S. Mill ) ने उद्यमिता को ' निरीक्षण ' ( Superintendence ) ' नियन्त्रण ' ( Control ) एवं ' निर्देशन ' ( Direction ) की योग्यता माना है । उनके अनुसार उद्यमिता व्यवसाय में जोखिम ने उठाने की क्षमता के साथ - साथ ' निर्देशन ' की योग्यता भी है । मार्शल ( Marshall ) ने भी उद्यमिता को जोखिम उठाने तथा प्रबन्ध करने की योग्यता के रूप में स्वीकार किया है । उनके अनुसार उद्यमिता व्यवसाय में जोखिमें उठाने , श्रम व पूँजी लाने , सामान्य योजना बनाने तथा इसकी प्रत्येक बातों का निरीक्षण करने का प्रबन्धकीय कार्य है । इस प्रकार मार्शल के अनुसार साहसी उपक्रम की स्थापना के बाद ' साहसी प्रबन्धक ' ( Entrepreneurial Manager ) के रूप में भी कार्य करता है ।
( 3 ) संगठन एवं समन्वय काय ( A Function of Organisation and Co - ordination ) - प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जे . बी . स ( J.B. Say ) ने उद्यमिता को उत्पादन के विभिन्न साधनों को संगठित एवं समन्वित करने का कार्य माना है । वे साहसी को ' संगठनकर्ता ' ( Organiser ) के रूप में देखते हैं । उन्होंने ' साहसी ' तथा ' पूँजीपति ' के मध्य स्पष्ट रूप से भेद किया था । उनके अनुसार , " उद्यमिता वह आर्थिक घटक है जो उत्पादन के समस्त साधनों को संगठित करता है । " साहसी वह आर्थिक अभिकर्ता है जो उत्पादन के विभिन्न साधनों भूमि , श्रम , पूँजी आदि को एक उचित अनुपात में समन्वित करके सामाजिक दृष्टि से उपयोगी वस्तु का निर्माण करता है । अल्फ्रेड मार्शल जे . बी . से के विचारों से बहुत प्रभावित थे । अतः उन्होंने भी ' संगठन ' को साहसी का एक विशिष्ट कार्य माना था ।
( 4 ) संगठन निर्माण योग्यता ( Organisation Building Ability ) - फ्रेडरिक हारबिसन ( Frederic Harbison ) ने संगठन निर्माण योग्यता को औद्योगिक विकास का महत्वपूर्ण आधार माना है । उनके अनुसार उद्यमिता उपक्रम के संसाधनों को विकसित करने , मानवीय क्षमता का विकास करने , नये विचारकों को समन्वित करने का नेतृत्व गुण है । हारबिसन उद्यमिता में नेतृत्व व सृजनात्मकता ( Creativity ) की योग्यता को अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं । उनका मत है कि सृजनात्मकता के कारण नवीन विचारों का जन्म होता है तथा नेतृत्व योग्यता के द्वारा उन विचारों का आर्थिक उपयोग किया जा सकता है । इस प्रकार संगठन निर्माण योग्यता के अभाव में ' नवप्रर्वतन ' आर्थिक विकास का आधार नहीं बन पाते हैं । दूसरे शब्दों में , साहसी का ' नवप्रवर्तक ' होना आवश्यक नहीं , किन्तु एक अच्छा नेता ( Leader ) एवं कुशल प्रशासक होना आवश्यक है । नेतृत्व , प्रशासन क्षमता एवं सृजनात्मकता के द्वारा ही वह संगठन का निर्माण कर सकता है ।
( 5 ) ' उच्च उपलब्धि ' की क्षमता ( A Capacity of High Achievement ) - मेक्कलीलैंड ( McClelland ) ( 1961 ) ने उद्यमिता के दो लक्षण बतलाये हैं-
( i ) कार्य को नये एवं कुशल ढंग से करने की योग्यता तथा
( ii ) अनिश्चितता में निर्णय लेने की क्षमता । इस प्रकार मेक्क्लीलैंड की विचारधारा में शुम्पीटर एवं केन्टीलॉन दोनों ही के विचार सम्मिलित हैं । उनके अनुसार उच्च उपलब्धि प्राप्त करना ही ' उद्यमिता ' है| जिसके लिए नवप्रवर्तन करने तथा जोखिमों में निर्णय लेने की क्षमता का होना आवश्यक होता है ।
( 6 ) नवप्रवर्तन योग्यता ( Innovating Ability ) - जोसेफ शुम्पीटर ( J. Schumpeter ) ने सर्वप्रथम 1934 में उद्यमिता को ' नवप्रवर्तनकारी योग्यता ' के रूप में परिभाषित किया था । उन्होंने लिखा है कि एक विकसित अर्थव्यवस्था में साहसी वह व्यक्ति है जो अर्थव्यवस्था में किसी नई बात को प्रस्तुतं करता है । वह व्यवसाय में नये परिवर्तनों नई वस्तु नई उत्पादन या वितरण विधि नये बाजार , नया कच्चा माल नई तकनीक नये अवसर आदि को जन्म देता है और उनसे लाभ प्राप्त करता है । इस प्रकार शुम्पीटर ने उद्यमिता को वातावरण का एक सृजनात्मक एवं नवप्रवर्तनशील प्रत्युत्तर माना है । यह विचार उद्यमिता के गतिशील स्वरूप को प्रकट करता है है । विकसित एवं विकासशील देशों में उद्यमिता का यही स्वरूप दिखाई देता है।
( 7 ) समूह स्तरीय प्रतिक्रियाशीलता ( Group Level Reactiveness ) - एफ . डब्ल्यू . यंग ( F.W. Young ) ने उद्यमिता को वैयक्तिक योग्यात के रूप में स्वीकार नहीं किया है । उनके . अनुसार उद्यमिता वैयक्तिक नहीं , वरन् सामूहिक स्तर पर उत्पन्न ' प्रतिक्रियाशीलता ( Reactiveness ) है । यंग मानते हैं कि उद्यमिता समाज में प्रतिक्रियावादी समूहों ' ( Activist Groups ) के कारण उत्पन्न होती है । वे उद्यमिता को सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों में परिवर्तन का कारण मानते हैं । महिलाओं , अल्पसंख्यकों उपभोक्ताओं समाज सुधारकों , पर्यावरणवादियों ( Environmentalists ) के द्वारा सामाजिक रूपान्तरण की दृष्टि से प्रकट की गई प्रतिक्रियाशीलता एवं विभेदीकरण ( Differentiation ) ही उद्यमिता को दर्शाता है । इस प्रकार उद्यमिता एक वैयक्तिक गुण नहीं , वरन् सामाजिक एकात्मकता के लिए प्रकट की जाने वाली प्रतिक्रिया क्षमता है।

